लंदन: ब्रिटेन का छोटा सा कस्बा एश्टन-इन-मेकरफील्ड इस समय देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। यहां होने वाला आगामी उपचुनाव न सिर्फ स्थानीय राजनीति को प्रभावित कर सकता है, बल्कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की नेतृत्व क्षमता और सत्ता पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
18 जून को होने वाले इस उपचुनाव को लेकर पूरे देश की नजरें इस सीट पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसे ब्रिटेन की सत्ता की भविष्य की दिशा तय करने वाला मुकाबला माना जा रहा है।
स्टार्मर की कुर्सी पर बढ़ा दबाव
हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को करारा झटका लगा था, जिसके बाद प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के भीतर कई नेता बदलाव की मांग कर रहे हैं और ऐसे में ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहम को संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
अगर बर्नहम इस उपचुनाव में जीत हासिल करते हैं, तो इसे लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे स्टार्मर की स्थिति और कमजोर हो सकती है।
रिफॉर्म UK की बढ़ती चुनौती
इस सीट पर मुकाबला केवल लेबर पार्टी तक सीमित नहीं है। निगेल फराज की रिफॉर्म UK पार्टी भी तेजी से मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। स्थानीय चुनावों में इस क्षेत्र में रिफॉर्म UK को लेबर पार्टी से कहीं अधिक समर्थन मिला था, जिससे पारंपरिक राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं।
मेकफील्ड में बदलते राजनीतिक रुझान
यह इलाका पहले लेबर पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था, जहां मजदूर वर्ग और औद्योगिक पृष्ठभूमि के मतदाता पारंपरिक रूप से पार्टी का समर्थन करते थे। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं।
स्थानीय लोगों में बढ़ती महंगाई, टैक्स का बोझ, रोजगार के अवसरों की कमी और इमिग्रेशन जैसे मुद्दों को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। इसी कारण मतदाता पारंपरिक पार्टियों से दूरी बनाते हुए नए राजनीतिक विकल्पों की ओर झुक रहे हैं।
ब्रेक्जिट और इमिग्रेशन भी अहम मुद्दे
इस क्षेत्र में ब्रेक्जिट का असर भी अब तक दिखाई देता है। 2016 में इस इलाके के लगभग 65 प्रतिशत लोगों ने यूरोपीय संघ छोड़ने के पक्ष में मतदान किया था। वहीं इमिग्रेशन को लेकर सख्त रुख अपनाने की मांग भी लगातार बढ़ रही है, जिसका फायदा रिफॉर्म UK को मिलता दिख रहा है।
एंडी बर्नहम की रणनीति और चुनौती
एंडी बर्नहम, जो फिलहाल ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर हैं और पहले ब्रिटिश सरकार में मंत्री रह चुके हैं, इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि उनके लिए यह मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा है।
उनकी राजनीतिक छवि और पुराने विचारों को लेकर भी बहस जारी है। जहां कुछ लोग उन्हें लेबर पार्टी के संभावित नए नेता के रूप में देखते हैं, वहीं विपक्षी दल उन्हें “सिस्टम का नेता” बताकर निशाना साध रहे हैं।
प्रधानमंत्री बनने की राह आसान नहीं
अगर एंडी बर्नहम यह उपचुनाव जीत भी जाते हैं, तब भी उनके लिए प्रधानमंत्री बनने की राह आसान नहीं होगी। इसके लिए उन्हें लेबर पार्टी के सांसदों और पार्टी सदस्यों का व्यापक समर्थन हासिल करना होगा, जो एक लंबी और जटिल राजनीतिक प्रक्रिया होगी।
